कॉलेज स्टूडेंट्स को नहीं मिल रही इंटर्नशिप, क्या है इसके पीछे की असली वजह?

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आज के समय में कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए इंटर्नशिप बहुत जरूरी मानी जाती है। पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस लेने के लिए छात्र इंटर्नशिप पर काफी निर्भर रहते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि बड़ी संख्या में छात्रों को सही इंटर्नशिप के मौके नहीं मिल पा रहे हैं।

कई कॉलेजों में इंटर्नशिप को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन जब असली मौके देने की बात आती है, तो वहां कमी साफ दिखाई देती है। कुछ कंपनियां कॉलेज में आती जरूर हैं, लेकिन उनकी संख्या सीमित होती है। ऐसे में सभी छात्रों को मौका मिल पाना मुश्किल हो जाता है।

Chandigarh के एक इंजीनियरिंग छात्र ने बताया कि उसने 20 से ज्यादा कंपनियों में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया, लेकिन उसे कहीं से जवाब नहीं मिला। यह समस्या सिर्फ एक छात्र की नहीं है, बल्कि हजारों छात्रों को इसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

जो इंटर्नशिप मिलती भी है, उनमें से कई बिना सैलरी की होती हैं या बहुत कम स्टाइपेंड देती हैं। कई बार कंपनियां स्टूडेंट्स से पूरा काम करवाती हैं, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ “एक्सपीरियंस” का नाम दिया जाता है। मजबूरी में छात्र ऐसी इंटर्नशिप करने को तैयार हो जाते हैं, ताकि उनके रिज्यूमे में कुछ जुड़ सके।

इसके अलावा, सही गाइडेंस की कमी भी एक बड़ी वजह है। कई छात्रों को यह नहीं पता होता कि इंटर्नशिप कैसे ढूंढनी है, कहां अप्लाई करना है और किन स्किल्स की जरूरत होती है। कॉलेजों में भी इस दिशा में पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पाता।

कंपनियों द्वारा “एक्सपीरियंस” की मांग भी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। ज्यादातर कंपनियां ऐसे उम्मीदवार चाहती हैं, जिनके पास पहले से अनुभव हो। लेकिन जब छात्रों को इंटर्नशिप ही नहीं मिलेगी, तो वे अनुभव कहां से लाएंगे? यह एक ऐसा चक्र बन जाता है, जिसमें छात्र फंस जाते हैं।

हालांकि, डिजिटल प्लेटफॉर्म के आने से कुछ नए मौके जरूर बने हैं। अब छात्र ऑनलाइन इंटर्नशिप, फ्रीलांसिंग और प्रोजेक्ट्स के जरिए भी सीख सकते हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें खुद से पहल करनी होती है और लगातार अपने स्किल्स को बेहतर बनाना पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या को दूर करने के लिए कॉलेजों और कंपनियों दोनों को जिम्मेदारी लेनी होगी। कॉलेजों को चाहिए कि वे ज्यादा कंपनियों के साथ जुड़ें और छात्रों को बेहतर अवसर दें, वहीं कंपनियों को भी फ्रेशर्स को सीखने का मौका देना चाहिए।

अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि इंटर्नशिप की कमी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका असर छात्रों के करियर पर पड़ सकता है। समाधान तभी संभव है, जब सभी पक्ष मिलकर इस दिशा में काम करें।

BY Arookh Khan

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